शरभपुरी वंश(5 - 6 वी शताब्दी )
- छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक मंदिर बनाने का श्रेय शरभपुरी वंश को जाता है।
- छत्तीसगढ़ का सबसे प्राचीन मंदिर देवरानी-जेठानी मंदिर(तालागांव) इसी वंश के राजाओ के द्वारा बनाया गया था।
- राजधानी -शरभपुर(वर्तमान सारंगढ़/सम्बलपुर)
- संस्थापक - शरभराज
- वंश का अन्य नाम - अमारार्य कुल/अमराज कुल
- वंश का धर्म - वैष्णव धर्म
शरभपुरी वंश से सबंधित प्रमुख ताम्रपत्र/अभिलेख
- भानुगुप्त का ऐरन अभिलेख
- पीपरदुल्ला ताम्रपत्र
- कुरुद ताम्रपत्र
- मल्हार ताम्रपत्र
- आरंग ताम्रपत्र
- महासमुंद ताम्रपत्र
- कोआताल अभिलेख
शरभपुरी वंशीय प्रमुख शासक
1. शरभराज :-- शरभपुरी वंश के संस्थापक थे।
- राजधानी - शरभपुर
- भानुगुप्त के ऐरन अभिलेख(510 ई.) से इनकी जानकारी मिलती है। इस अभिलेख के अनुसार यह वंश वाकाटक वंश के शासक प्रवरसेन का सामंत था।
- इन्होने अपने नाम के सिक्के चलवाये जिसमें संस्कृत भाषा का प्रयोग किया गया था।
- इनके शासनकाल को उन्नत और उत्कर्ष कहा जाता है । इन्होने अपने शासन के तीसरे वर्ष पीपरदुल्ला ताम्रपत्र जारी करवाया।
- कुरुद ताम्रपत्र में इनके शासन के 24 वें वर्ष रजत जयंती बनाये जानें का उल्लेख मिलता है।
- इन्होने अपनी मुद्राओं में गजलक्ष्मी का अंकन करवाया।
- इस वंश के सबसे प्रतापी राजा प्रसन्नमात्र था। इन्होने निडिला नदी(लीलागर) के किनारे प्रसन्नपुर(मल्हार) नगर बसाया।
- इन्होने गरुड़ ,चक्र,शंख युक्त सोने के सिक्के चलवाये,इन सिक्को में पेटिका शीर्ष लिपि का प्रयोग किया।
- उपाधि - महाजयराज
- अन्य नाम - दुर्गराज,मनमात्र
- जानकारी - मल्हार ताम्रपत्र
- धर्म - वैष्णव धर्म
- इन्होने दुर्ग नगर की स्थापना किया। ब्राह्मणों को दान देने के प्रथा प्रचलित करवाई।
- मुद्रा पर गजलक्ष्मी का अंकन करवाया।
- इन्होने अपनी राजधानी सिरपुर को बनाया।
- जानकारी - आरंग ताम्रपत्र /महासमुंद अभिलेख /कोआताल अभिलेख
- राजधानी - सिरपुर
- इनके 8 ताम्रपत्र मिलते है जिसमे 6 सारंगढ़ से और 2 सिरपुर से प्राप्त हुए है।
- इनके सामंत इन्द्रबल था।
- उपाधि - परमभागवत
- धर्म - भागवत
- जानकारी - मल्हार ताम्रपत्र/लेख ठाकुरदिहा ताम्रपत्र से
- सुदेवराज के सामंत इन्द्रबल ने सुदेवराज के पुत्र प्रवरराज द्वितीय की हत्या कर इस क्षेत्र में में पाण्डुवंश की नींव रखी।
- अंतिम शरभपुरी शासक था।
शरभपुरी वंशो की राजधानियाँ
- शरभराज - शरभपुर
- प्रसन्नमात्र - मल्हार
- प्रवरराज प्रथम - सिरपुर


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