पर्वत द्वारक वंश
सोमन्नराज ने अपनी माता के बीमार पड़ जाने पर देवभोग नामक ग्राम को दान दिया था। देवभोग क्षेत्र के चावल गरियाबंद जिले की पहचान है। लोक मान्यता है कि पूर्व में देवभोग क्षेत्र का चावल, भगवान जगन्नाथ के भोग के लिए जगन्नाथपुरी भेजा जाता था इसलिए इस इलाके के चावल का नाम देवभोग हो गया।
पर्वत द्वारक वंश के दुसरे शासक तुष्टिकर के तेराशिंघा ताम्रपत्र ( तेल नदी घाटी से प्राप्त ) में इस वंश के दो शासकों के बारे में जानकारी मिलती है।
शासक :-
- सोमन्नाराज
- तुष्टिकर


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