नई दिल्ली। तकरीबन दो साल के इंतज़ार के बाद मिर्ज़ापुर का दूसरा सीज़न अमेज़न प्राइम वीडियो पर गुरुवार रात को तय समय से लगभग 3 घंटे पहले ही रिलीज़ कर दिया गया। गुड्डू पंडित का बदला, मिर्ज़ापुर की गद्दी के लिए मुन्ना त्रिपाठी की तड़प और कालीन भैया की राजनीतिक महत्वाकांक्षा... पर इस सीज़न की कहानी गढ़ी गयी। मगर, पहले सीज़न वाली धार दूसरे सीज़न में कुंद पड़ती नज़र आयी। पुराने और नये किरदारों के बीच झूलते दूसरे सीज़न का सफ़र रोमांच के मामले में फिसड्डी साबित हुआ।
अगर दूसरे सीज़न का भौकाल किसी ने टाइट रखा तो वो महिला किरदार हैं, जिन्होंने कुछ चौंकाने वाले ट्विस्ट और टर्न्स इस सीज़न को दिये। मिर्ज़ापुर 2 जहां पुरुष किरदारों के दंभ और श्रेष्ठ होने की विरासत को आगे बढ़ाता है, वहीं इस शोषक व्यवस्था को चुनौती देने की महिला किरदारों की हिम्मत और साजिशों को रेखांकित करता है। इन किरदारों के ज़रिए मिर्ज़ापुर की पुरुषवादी व्यवस्था पर गहरी चोट की गयी है। गुड्डू का बदला हो या मुन्ना त्रिपाठी की मिर्ज़ापुर का किंग बनने की ललक या फिर कालीन भैया की सियासी कसक, सभी की सफलता और विफलता में महिला किरदारों का ही योगदान है।
ख़ासकर अखंडानंद त्रिपाठी यानी कालीन भैया की पत्नी बीना त्रिपाठी (रसिका दुग्गल) का किरदार दूसरे सीज़न में उभरकर आया है। घर में ससुर सत्यानंद त्रिपाठी (कुलभूषण खरबंदा) के शोषण के ख़िलाफ़ बीना का मौन विद्रोह मिर्ज़ापुर 2 में होने वाली प्रमुख घटनाओं का मुख्य टर्निंग प्वाइंट कहा जा सकता है, क्योंकि इसके बिना गुड्डू पंडित का बदला पूरा नहीं होता।
वहीं, दूसरा किरदार माधुरी यादव है, जो सीएम की बेटी और कुछ घटनाक्रम के बाद मुन्ना त्रिपाठी (दिव्येंदु) की पत्नी बन जाती है। इस किरदार ने कालीन भैया की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पलीता लगाकर उसे कमज़ोर करने में अहम रोल निभाया। और यही किरदार मुन्ना त्रिपाठी को बग़ावत के रास्ते पर ले जाने के लिए प्रेरित करता है। इस नये किरदार को ईशा तलवार ने निभाया।
तीसरा महिला किरदार, जो मिर्ज़ापुर 2 में छाया, वो है गोलू गुप्ता, जिसे श्वेता त्रिपाठी ने निभाया है। त्रिपाठियों से बदला लेने के लिए गोलू, गुड्डू के साथ खड़ी रहती है। गोलू के ट्रैक के ज़रिए दद्दा त्यागी (लिलीपुट) और उनके जुड़वां बेटों (विजय वर्मा) के किरदारों को आगे बढ़ने की वजह मिलती है। वर्ना मिर्ज़ापुर 2 में इन नये किरदारों की अहमियत शून्य रहती।
मिर्ज़ापुर 2 की एक कमज़ोरी इसकी कहानी के नये पुरुष किरदार भी हैं, जो सीज़न की पकड़ मजबूत करने में कोई ख़ास योगदान नहीं करते। फिर चाहे वो शरद शुक्ला का किरदार हो, जो रति शंकर शुक्ला का बेटा है या फिर दद्दा त्यागी और उनके जुड़वां बेटों के किरदार। पूरा सीज़न अधिकतर पुराने किरदारों के कंधों पर ही टिका रहता है। ख़ासकर, शरद शुक्ला वाले किरदार से इस बार कुछ धमाके की उम्मीद की जा रही थी, मगर यह किरदार उभरकर नहीं आ सका। शायद इन्हें तीसरे सीज़न के लिए बचाकर रखा गया है।
मिर्ज़ापुर में जहां बब्लू पंडित (विक्रांस मैसी) और स्वीटी गुप्ता (श्रिया पिलगांवकर) के किरदारों का अंत हुआ था, वहीं दूसरे सीज़न में सत्यानंद त्रिपाठी और मुन्ना त्रिपाठी (दिव्येंदु) के किरदार अपने अंजाम तक पहुंचा दिये गये हैं। गुड्डू पंडित का बदला पूरा हुआ और मिर्ज़ापुर की गद्दी उन्हें मिल गयी है।
ज़ाहिर है कि तीसरे सीज़न की कहानी कालीन भैया की वापसी पर आधारित होगी, जिन्हें गुड्डू पंडित के अटैक के बाद शरद शुक्ला बचाकर ले जाता है। मगर, जिस बेताबी से मिर्ज़ापुर 2 का इंतज़ार किया गया, लगता नहीं कि तीसरे सीज़न के लिए वो बेताबी कायम रहेगी। पहले सीज़न की सबसे बड़ी ताक़त इसके पैने और तीखे संवाद थे। स्थानीय भाषा की छौंक लिए यह डायलॉग मिर्ज़ापुर की पहचान बन गये, मगर मिर्ज़ापुर 2 में यह डायलॉगबाज़ी प्रभावहीन रही।
कलाकार- पंकज त्रिपाठी, अली फ़ज़ल, दिव्येंदु, रसिका दुग्गल, ईशा तलवार, श्वेता त्रिपाठी, कुलभूषण खरबंदा, राजेश तैलंग, विजय वर्मा, हर्षिता गौड़ आदि।
निर्देशक- गुरमीत सिंह और मिहिर देसाई
निर्माता- फरहान अख़्तर और रितेश सिधवानी


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