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| पाली मंदिर |
- स्थापना - 1000 ई.(छत्तीसगढ़ में कलचुरी वंश की स्थापना)
- मूल पुरुष/आदिपुरुष - कृष्णराज
- संस्थापक - कलिंगराज
- अंतिम शासक - रघुनाथ
- राजकीय भाषा - संस्कृत
- कुल देवी - गजलक्ष्मी
- प्रसिद्ध कवि - गोपाल मिश्र , बाबू रेवाराम
- तुम्माण(छत्तीसगढ़ में कलचुरियो की प्रथम राजधानी)-कलिंगराज
- रतनपुर (छत्तीसगढ़ में कलचुरियो की दूसरी राजधानी ) - रतनदेव प्रथम
- छुरी कोसगई(वर्तमान नाम-छुरी )- बाहरेन्द्र साय
कोक्कल प्रथम के पुत्र शंकरगढ़ द्वितीय ने बाण वंश को समाप्त कर पाली क्षेत्र में अपना अधिकार स्थापित किया। जिसे 950 ई. में सोमवंशीय शासको ने अपने अधिकार क्षेत्र में लिया। कालांतर में त्रिपुरी के शासक लक्ष्मणराज ने अपने पुत्र कलिंगराज के नेतृत्व में सेना भेजकर यहाँ पर कलचुरियो की वास्तविक सत्ता स्थापित की।
रतनपुर कलचुरी शाखा के प्रमुख शासक
1. कलिंगराज(1000 ई. से 1020 ई.)
- छत्तीसगढ़ में कल्चुरी वंश का वास्तविक संस्थापक थे। इन्होने कलचुरियो की वास्तविक सत्ता स्थापित की और कल्चुरी वंश की नीव डाली।
- वर्णन - अमोदा ताम्रपत्र और अलबरूनी के तहक़ीक़-ऐ-हिन्द में कलिंगराज का उल्लेख मिलता है।
- राजधानी - तुम्माण(कलचुरियो की छत्तीसगढ़ में प्रथम राजधानी )
- निर्माण - महिषासुर मर्दिनी मंदिर(चैतुरगढ़ )
2. कमलराज(1020 ई. से 1045 ई.)
- त्रिपुरी के राजा गंगदेव की उड़ीसा अभियान पर सहायता प्रदान की थी।
- राजधानी - 1050 ई. में रतनपुर नगर की स्थापना की । इन्होने तुम्माण के स्थान पर रतनपुर को अपनी राजधानी बनाया।
- निर्माण - 11 वी शताब्दी में महामाया मंदिर(रतनपुर) ,मीहिषासुर मर्दिनी(लाफागढ़) ,अनेक तालाबों का निर्माण(रतनपुर)
- इनके समय रतनपुर का वैभव देखकर कुबेर की संज्ञा दी गयी।
4. पृथ्वीदेव प्रथम(1065 ई. - 1095 ई.)
- उपाधि - सकलकोशलाधिपति
- ताम्रपत्र - इस ताम्रपत्र के अनुसार पृथ्वी देव प्रथम को 21000 गाँवो का स्वामी कहा गया।
- निर्माण - चैतुरगढ़ का किला , पृथ्वी देवेश्वर मंदिर(तुम्माण) ,विशाल तालाब(रतनपुर),बंकेश्वर मंदिर
- कल्चुरी वंश का सर्वाधिक शक्तिशाली राजा जाजल्यदेव प्रथम थे।
- गुरु - रूद्रशिव
- उपाधि - गजशार्दूल
- नगर - इन्होने जाजल्यपुर(जांजगीर) नगर बसाया।
- सिक्के - इन्होने अपने शासनकाल में सोने और तांबे के सिक्के चलवाये। स्वर्ण सिक्को में गजशार्दूल व श्रीमद जाजल्यदेव अंकित करवाया।
निर्माण -
- जाजल्यपुर में विष्णु मंदिर(नकटा मंदिर) का निर्माण करवाया।
- पाली के शिवमंदिर का जीर्णोध्दार करवाया।
विजय अभियान -
- इन्होने कलचुरियो की मुख्य शाखा को ख़त्म कर दिया।
- फणिनागवंशीय शासक गोपालदेव को अपने अधीन शासन करवाया।
- छिन्दकनागवंशीय शासक सोमेश्वर प्रथम को पराजित उसकी राजधानी को जला दिया व उनके पुरे परिवार को बंदी बना लिया।
- ओडिसा पर आक्रमण कर सुवर्णपुर के राजा भुजबल को पराजित किया।
मंत्री - पुरुषोत्तम
संधिविग्रहिक - विग्रहराज
6. रतनदेव द्वितीय(1120 ई. - 1135 ई.)
- जानकारी - इनकी जानकारी कोनी अभिलेख से मिलती है। इस अभिलेख से जानकारी मिलती है की इनके शासन में कई विद्वान व कलाकार थे।
- रतनदेव प्रथम को 36 विधाओं का ज्ञाता व युध्द प्रिय कहा जाता है।
- सिक्के - सोने व चांदी के सिक्के
- कलिंग देश के गंगवंशीय शासक अनंतवर्मन को पराजित किया।
- बंगाल के गोंड राजा को पराजित किया।
- त्रिपुरी के नरेश गयाकर्ण के आक्रमण को विफल किया।
7. पृथ्वी देव द्वितीय
- जानकारी - राजिम शिलालेख से
- सिक्के - रजत व स्वर्ण,चांदी(सबसे छोटे सिक्के )
- अभिलेख - 13 (सर्वाधिक अभिलेख प्राप्त )
निर्माण -
- सेनापति जगतपाल ने राजीव लोचन मंदिर का निर्माण करवाया ।
- सामंत वल्लभराज ने खारंग झील का निर्माण करवाया।
- रतनपुर किले का निर्माण इन्ही के शासन में हुआ।
विजय अभियान -
- ब्रह्मदेव के साथ मिलकर कलिंग के शासक जटकेशवर को पराजित किया।
- चक्रकोट के गंग राजाओ को पराजित किया।
- साम्राज्य का सर्वाधिक विस्तार इन्ही के शासनकाल में हुआ था।
8. जाजल्यदेव द्वितीय(1166 ई.-1168 ई.)
- अल्पकालीन शासन।
- त्रिपुरी के कल्चुरी शासक जयसिंह ने रतनपुर पर आक्रमण किया जो असफल रहा।
- गोंड देश के राजाओ पर आक्रमण किया।
9. जगददेव(1168 ई-1178 ई)
10. रतनदेव तृतीय(1178 ई.-1198 ई.)
जीर्णोध्दार -
- सेनापति गंगाधर राव ने खरोद के लक्ष्मणेश्वर मंदिर का जीर्णोध्दार करवाया।
- लखनीदेवी मंदिर(रतनपुर ) का निर्माण करवाया।
11. प्रतापमल्ल(1198 ई.-1222 ई.)
- सबसे काम उम्र के प्रतापी राजा थे।
- ताम्रपत्र - बिलाईगढ़ ,कोनारी, पेडरबंध
- सिक्के - चक्राकार व षट्कोणाकर तांबे के सिक्के चलवाये।
अंधकार युग
- प्रतापमल्ल के बाद लगभग 200 वर्षो तक के शासनकाल के स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती है जिसके कारन इस समय को अंधकार युग कहा जाता है।
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