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छत्तीसगढ़ का मध्यकालीन इतिहास: कलचुरी वंश(1480 - 1757 ई. )

 कोसगई के कलचुरी वंश(1480 - 1757 ई. )

chhattisgarh kalchuri vansh

प्रमुख शासक 

  1. वाहरेंद्र/बाहरसाय ( 1480-1525 ई.)
  2. कल्याण साय ( 1544 - 1581 ई.)
  3. लक्ष्मण साय(1685 -1689 ई.)
  4. तखतसिंह(1685 -1689 ई.) 
  5. राज सिंह ( 1689 - 1712 ई.)
  6. सरदारसिंह(1712 -1732 ई.) 
  7. रघुनाथ सिंह(1732 -1745 ई. ) - अंतिम शासक। 
  8. मोहनसिंह(1745 -1757 ई.) -मराठा अधीन अंतिम शासक।

कोसगई के कलचुरी वंश के प्रमुख शासक (1480 - 1757 ई. )

1. वाहरेंद्र/बाहरसाय (1480- 1581 ई):-

  1. राजधानी -कोसगई(कोरबा)
  2. बाहरेन्द्रसाय  ने अपने राजधानी  रतनपुर के स्थान पर छुरी कोसगई को बनाया और कोषागार की स्थापना करवाई।
  3. निर्माण - कोसगई मंदिर ,चैतुरगढ़ का किला 

2. कल्याणसाय(1544- 1581 ई)  :-

  1. समकालीन - जंहागीर,अकबर (मुग़ल वंश )
  2. राजस्व सुधार - जमाबंदी प्रणाली ,गढ़ व्यवस्था की शुरुआत(ब्रिटिश अधिकारी मि. चिस्म ने प्रदेशो को छत्तीसगढ़ में विभाजित किया )।

3. लक्ष्मणसाय:-

  1. देश में बहीखाता और लेखा-जोखा बजट प्रणाली की सूरत की।

4. तखतसिंह(1685-1689 ई.) :-

  1. समकालीन - ओरंगजेब 
  2. नगर - तखतपुर की स्थापना 
  3. धर्म - शैव 
  4. सरंक्षण - वैष्णव 

5. राजसिंह(1689-1712 ) :-

  1. निर्माण - बादल महल ,राजपुर नगर की स्थापना रतनपुर के पास की।
  2. दरबारी कवि - गोपाल मिश्र(1889 में अपनी खूब तमाशा में औरगजेब की कूटनीतियों का वर्णन किया )
  3. विशेष - राजसिंह का उत्तराधिकारी न होने के कारन उन्होंने रायपुर के मोहनसिंह को उत्तराधिकारी घोषित किया । मोहन सिंह की अनुपस्थिति के कारण अपने चाचा सिरदार सिंह को शासन की बागडोर सौप दी।

6. सिरदार सिंह(1712-1732 ) :-

  1. संतान  होने के कारण अपने भाई रघुनाथ सिंह को सत्ता सौप दी।

7. रघुनाथ सिंह(1732- 1745) :- 

  1. मराठा शासक रघुजी प्रथम के सेनापति भास्कर पंत उड़ीसा अभियान के दौरान ने 1741 ई.मुखबीर मोहरबीब के कहने पर रतनपुर पर आक्रमण किया।
  2. यह अंतिम स्वंत्रत कलचुरी शासक थे।
  3. रघुनाथ सिंह से भास्कर पंत द्वारा 1 लाख का जुर्माना लगाकर सम्पूर्ण खजाना को लूट लिया गया। रतनपुर से जाते समय कल्याणगिरी  गोसाई को अपना मराठा प्रतिनिधि नियुक्त किया।

8. मोहनसिंह(1745-1757 ई.) :-

  1. मराठाओ के अधीन अंतिम शासक था। 
  2. 1757 ई. में मोहनसिंह की मृत्यु के बाद मराठा शासक बिम्बाजी भोंसले ने रतनपुर में अप्रत्यक्ष रूप से शासन किया।

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