गुप्त वंश (gupta Period)
गुप्त वंश 275 ई. के आसपास अस्तित्व में आया। इसकी स्थापना श्रीगुप्त ने की थी। लगभग 510 ई. तक यह वंश शासन में रहा। गुप्त काल में मध्य छत्तीसगढ़ को दक्षिणापथ/कोसल व दंडकारण्य को महाकांतार कहा जाता था।
समुद्रगुप्त
- हरिषेण की प्रयाग प्रशस्ति के अनुसार समुद्रगुप्त ने अपनी दक्षिण विजय अभियान के दौरान दक्षिण कोसल के राजा महेंद्र सेन (वाकाटक वंश ) और महाकांतार (बस्तर के शासक ) के नलवंशीय शासक व्याघ्रराज को पराजित किया।
- महासमुंद के कोपरा नामक ग्राम में समुद्रगुप्त की पत्नी रूपा देवी के साक्ष्य मिले है।
- रामगुप्त के सिक्के बानाबरद (दुर्ग) से प्राप्त हुए है।
- इन्होने अपनी पुत्री प्रभावती का विवाह वाकाटक वंश के शासक राजा रुद्रसेन से करवाया।
- कुमारगुप्त का रत्नजड़ित मयूर सिक्का आरंग से मिला।
- भानुगुप्त के ऐरन अभिलेख (510 ई.) में शरभपूरी वंशीय राजा शरभराज का वर्णन है ।
- हरिषेण की प्रयाग प्रशस्ति में समुद्रगुप्त का दक्षिण अभियान का समय उल्लेख है।
- गुप्त कालीन सिक्के मिले - बानाबरद (दुर्ग) और आरंग (रायपुर ) से मिले ।
- गुप्तकालीन स्थल - तालगांव मंदिर ,पुजारीपाली(बरमकेला) के केवटिन मंदिर


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