नमस्कार दोस्तों, एक बार फिर से आपका स्वागत है gkfunda4u में आज हम रायपुर के कल्चुरि वंश बारे में बात करेंगे और साथ ही उनके अधिकार क्षेत्र और उनकी शक्तियों क्या है उनके बारे में भी जानेंगे। मित्रों, छत्तीसगढ़ के इतिहास इस टॉपिक का बहुत ही महत्व है। जो की छत्तीसगढ़ में होने वाले सभी एग्जाम के महत्वपूर्ण है।
रायपुर
के कलचुरियो की लहुरी शाखा
14 वी शताब्दी में वीरसिंह देव के शासनकाल के समय कल्चुरि साम्राज्य का
विभाजन हो गया
जिसके बाद कलचुरियो की नवीन शाखा के रूप में लहुरी शाखा का उदय हुआ जिसके प्रथम
शासक केशवदेव थे। लहुरी शाखाओ के राजाओ का उल्लेख रायपुर और खल्लारी शिलालेख में
मिलता है। यह दोनों अभिलेख लहुरी शाखा के शासक ब्रह्मदेव के है। इस शाखा के अंतिम
शासक अमरसिंह है। इनके बाद रायपुर में अप्रत्यक्ष रूप से मराठाओ ने शासन किया।
- संस्थापक - केशव देव
- राजधानी - खल्लारी (महासमुंद)
- उपासक -
शैव
- कुल देवी
- गज लक्ष्मी
रायपुर के कल्चुरि शासको का क्रम(1300 -1753 ई.)
- लक्ष्मीदेव - 1300 ई. से 1340 ई. तक
- सिंघनदेव -1340 ई. से 1380 ई. तक
- रामचंद्रदेव - 1380 ई. से 1400 ई.तक
- ब्रम्ह देव - 1400 ई. से 1420 ई. तक
- केशव देव - 1420 ई. से 1438 ई. तक
- भुनेश्वर देव - 1438 ई. से 1468 ई. तक
- मानसिंह देव - 1468 ई. से 1478 ई. तक
- संतोष सिंह देव - 1478 ई.से 1498 ई. तक
- सूरत सिंह देव - 1498 ई. से 1518 ई. तक
- सैनीसिंह देव - 1518 ई. से 1563 ई. तक
- चामुंडासिंहदेव -1528 ई.-1582 ई. तक
- धनसिंह देव -1582 ई. -1604 ई. तक
- जैतसिंह - 1604 ई.- 1615 ई. तक
- फत्तेसिंह - 1615 ई. -1636 ई.तक
- यादसिंह - 1636 ई. - 1650 ई. तक
- सोमदत्त देव - 1650 ई. - 1663 ई. तक
- बलदेवसिंह देव - 1663 ई. -1682 ई.तक
- उमेद सिंह देव -1685 ई.-1705 ई. तक
- बनवीर सिंह देव - 1705 ई. -1741 ई.तक
- अमरसिंह देव - 1741 ई. -1753 ई. तक
1. लक्ष्मीदेव(1300 -1340 ई.)
- 14 वी शताब्दी में रतनपुर के शासक ने लक्ष्मीदेव को खल्लारी भेजा।
- राजधानी
- खल्लारी
2. सिंघनदेव(1340 -1380 ई.)
- ब्रह्मदेव के शिलालेख में सिंघनदेव द्वारा जीते गए 18 गढ़ो का उल्लेख मिलता है।
3. रामचन्द्रदेव(1380 -1400 ई.)
- रायपुर शहर की स्थापना अपने पुत्र के नाम पर किया।
4. ब्रह्मदेव(1400 -1420)
- इन्ही के शासनकाल से रायपुर का उल्लेख मिलता है।
- शिलालेख - रायपुर शिलालेख , खल्लारी शिलालेख ।
- रायपुर(1409 ) को अपनी राजधानी बनाया।
निर्माण -
- 1415 ई. देवपाल नमक मोची ने खल्लारी में नारायण मंदिर(विष्णु मंदिर) का निर्माण करवाया।
- रायपुर
में दूधाधारी मठ कानिर्माण करवाया
युद्ध - फणिनागवंशीय
शासक मोनिक देव को पराजित किया।
4. केशवदेव(1420 -1438 ई. )
- क्रम - कल्चुरि वंश के 37 वें राजा थे।
- इन्ही के समय से कल्चुरि शाखा की शुरुआत होती है।
- रायपुर के कल्चुरि वंश के संस्थापक इन्हे ही माना जाता है।(छत्तीसगढ़ psc में रामचंद्र को संस्थापक के रूप में लिया गया है)
- राजधानी
-खल्लारी
अमरसिंह(1741 -1753 ई .)
- रायपुर के लहुरी शाखा के अंतिम स्वंत्रत शासक थे।
- 1750 ई. बिना किसी विरोध के गद्दी को छीन ली गयी। अमरसिंह को रायपुर ,पाटन और राजिम के परगने दिए गए।
- 1753 में अमरसिंह की मृत्यु हो गयी।
शिवराज
सिंह(1753 -1757 ई.)
- मराठाधीन अंतिम शासक थे।
- इनके बाद मराठाओ ने अप्रत्यक्ष रूप से रायपुर में शासन किया।
कल्चुरि
वंश की सत्ता के पतन
के कारण
- 18 वी शताब्दी के दौरान कल्चुरि शासको की केंद्रीय सत्ता कमजोर होने लगी और मोहनसिंह के षंड्यंत्रो ने प्रदेश में एक नई राजनीतिक शक्ति के उदय के अनुकूल वातावरण प्रदान किया।
- 1741 में उड़ीसा अभियान के दौरान भोसलावंश के सेनापति भास्कर पंत ने रतनपुर पर आक्रमण किया। कल्चुरि शासक रघुनाथ सिंह ने आत्मसमपर्ण कर दिया।
- 1758 में मराठो ने रायपुर के कल्चुरि शासक अमरसिंह को अपने नियंत्रण में ले लिया। इस प्रकार 750 ई.तक शासन करने वाले कल्चुरि शासको का अंत हो गया।


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