मौर्य काल (Mourya Period)
मौर्य राजवंश (Maurya Empire) प्राचीन भारत का एक शक्तिशाली एवं महान राजवंश क्षत्रिय वंश था। इसने 137 वर्ष में भारत में राज किया। इसकी स्थापना का श्रेय चंद्रगुप्त मौर्य (Chandragupta Maurya) को और उनके मंत्री कौटिल्य को दिया जाता है। जिन्होने नंद वंश के सम्राट को पराजित किया था।मौर्य काल महानतम सम्राट अशोक के शासनकाल से सम्बंधित है अनेक साक्ष्य छत्तीसगढ़ में प्राप्त हुए है।
मौर्य कालीन साक्ष्य :-
- जोगीमारा की गुफा रामगढ की पहाड़ी (सरगुजा ) में अशोक के खुदे हुए अभिलेख प्राप्त हुए है। इसकी भाषा- पाली और लिपि -ब्राम्ही लिपि है।
- सीताबेंगरा की गुफा को विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला माना जाता है। यह देवदासी सुतनुका और उनके प्रेमी देवदत्त का उल्लेख मिलता है।
- मौर्य कालीन सिक्के - अकलतरा ,ठठारी ,जांजगीर-चांपा, बारगॉव -रायगढ़
- मौर्य कालीन आहत मुद्राएं - तारापुर ,आरंग ,उड़ेला (रायपुर जिला )
- बौद्ध साहित्य में प्राप्त उल्लेख - सिरपुर विद्यालय के कुलपति बौद्ध दार्शनिक नागार्जुन थे.
सातवाहन वंश (Satvahan Vansh)
इस वंश के प्रतापी शासक गौतमी पुत्र सतकर्णी ने कलिंग व कोसल क्षेत्र में अधिकार किया था। यह मौर्योत्तर काल के महत्वपूर्ण वंश था। जिसके शासन क्षेत्र में छत्तीसगढ़ भी शामिल था इसके अनेक पुरातात्विक साक्ष्य प्राप्त हुए है। सातवाहन वंश के शासको की राजधानी प्रतिष्ठान (पैठान )महाराष्ट्र थी । छत्तीसगढ़ में सातवाहन कालीन साक्ष्य :-
- सातवाहन वंश के शासक अपिलक की मुद्रा - बालपुर( रायगढ़) ,मल्हार (बिलासपुर) से प्राप्त हुए।
- सातवाहन वंश की रोमकालीन स्वर्ण मुद्राएं - चकरबेडा बिलासपुर
- सातवाहकालीन शिलालेख - राजा वरदत्तश्री की जानकारी गुंजी अभिलेख (शक्ति)जांजगीर -चांपा में मिलता है।
- सातवाहन वंश कालीन काष्ठ स्तम्भ - किरारी ग्राम जांजगीर चांपा से प्राप्त हुआ है।
- मिटटी के मुहर - बुढ़ीखार मल्हार (बिलासपुर )से मिटटी की मुहर प्राप्त हुई ,जिसमे वेदश्री का वर्णन है
- सातवाहन वंश की रोमकालीन स्वर्ण मुद्राएं - चकरबेडा बिलासपुर से प्राप्त
कुषाण वंश(Kushan Period)
शासन की अवधि -प्रथम ईसवीं छत्तीसगढ़ में कुषाण कालीन साक्ष्य :-
- पुरातात्विक साक्ष्य - कुषाण कालीन तांबे के सिक्के बिलासपुर से प्राप्त हुए है व खरसियां के तेलीकोट(रायगढ़) से पुरातात्विकविद डॉ. डी के शाह को कनिष्क के सिक्के प्राप्त हुए है।
मेघवंश(Megh Dynasty)
सातवाहन वंश के बाद और गुप्त वंश के पहले मेघ वंश का शासन था।- छत्तीसगढ़ में मेघवंशीय शासक शिवमेघ व यमेघ की जानकारी मिलती है।
वाकाटक वंश(Vakatak Dynasty)
इस वंश के प्रमुख शासक :-
- महेन्द्रसेन - प्रयाग प्रशस्ति के अनुसार समुद्र गुप्त ने दक्षिण विजय अभियान के दौरान दक्षिण कौशल के राजा महेन्द्रसेन को हराया था।
- प्रवरसेन - यह इक विस्तारवादी राजा था , छत्तीसगढ़ में वाकाटक वंश के संस्थापक इन्ही को माना जाता है। इसके आश्रय में महाकवि कालिदास ने कुछ समय व्यतीत किया। महाकवि कालिदास ने अपनी यात्रा के दौरान रामगढ की पहाड़ी पर मेघदूतम की रचना की। इसी मेघदूतम का छत्तीसगढ़ भाषा में मुकुटधर पांडेय ने अनुवाद किया था ।
- नरेंद्र सेन - रिद्धिपूर अभिलेख के अनुसार नलवंशी शासक भवदत्त ने नरेंद्र सेन को पराजित किया
- पृथ्वी सेन - केसरीबेड़ा अभिलेख के अनुसार नलवंशी राजा अर्थपति को पृथ्वी सेन ने पराजित किया और उनकी राजधानी पुष्करि को तहस - नहस कर दिया ।
- हरिसेन - जब वाकाटक वंश समाप्त होने कगार में था तब वत्स गुलाम वंश के वाकाटक ने आकर शासन किया।


0 टिप्पणियाँ