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छत्तीसगढ़ का इतिहास: नल वंश का इतिहास (History Of Nal Vansh)

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नल वंश (4 - 12 वी सदी )
  1. शासनकाल : 4 थी  से 12 वी सदी 
  2. राजधानी : पुष्करी(भोपालपट्टनम)/कोरापुट(ओड़िसा)
  3. शासन क्षेत्र : दंडकारण्य/महाकांतार 
  4. संस्थापक : शिशुक 
  5. वास्तविक संस्थापक : वरहराज 
  6. वंश का वर्णन : वायु पुराण 
  7. मुद्रा : अड़ेगा(कोंडागांव)
प्रमुख नलवंशीय ताम्रपत्र 
  1. रिद्दीपुर ताम्रपत्र - भवदत्त
  2. कसरीबेड़ा ताम्रपत्र - अर्थपति 
  3. पड़ियापाथर  ताम्रपत्र - भीमसेन द्वीतीय 
  4. राजिम शिलालेख - विलासतुंग 
  5. पोड़ागढ़ शिलालेख - स्कंदवर्मन 
नलवंश के प्रमुख शासक

1 शिशुक :-
  1. इसे नलवंश का संस्थापक माना जाता है। 
2 व्याघ्रराज :-
  1. हरिषेण की प्रयाग प्रशस्ति के अनुसार समुन्द्रगुप्त ने दक्षिणापथ विजय अभियान के दौरान नलवंशीय शासक व्याघ्रराज को पराजित किया और व्याघ्रहंता की उपाधि धारण किया। 
3 वृषभराज:- 
  1. इन्होने ने सिर्फ सत्ता का संचालन किया। 
4 वराहराज(400 -440 ई.) :-
  1. इन्हे नलवंश का वास्तविक संस्थापक माना जाता है। 
  2. वराहराज की मुद्रा कोंडागांव के अड़ेगा गांव से मिली है । अड़ेगा गांव में प्राप्त मृदभांड में 29 स्वर्ण मुद्राएं मिली है। 
5 भवदत्तवमर्न(440 -460 ई.) :-
  1. उपाधि - महाराजा , भट्टारक 
  2. विवाह - अंचाली भट्टारिका 
  3. जानकारी - रिद्दीपुर ताम्रपत्र ,पोड़ागढ़ शिलालेख 
  4. भवदत्त के रिद्दीपुर अभिलेख के अनुसार इन्होने ने वाकाटक नरेश नरेंद्र सेन  को पराजित कर उसकी राजधानी नंदिवर्धन(नागपुर ) को तहस नहस कर दिया था । 
6 अर्थपति भट्टारक(460 -475 ई.) :-
  1. राजधानी - पुष्करी। 
  2. उपाधि -भट्टारक । 
  3. जानकारी - केसरीबेड़ा  ताम्रपत्र  ,पड़ियापाथर अभिलेख ,पोड़ागढ़ शिलालेख। 
  4. कसरीबेड़ा ताम्रपत्र के अनुसार वाकाटक नरेश पृथ्वीसेन ने अर्थपति भट्टारक को पराजित कर उसकी रक्धानी पुष्करी को तहस-नहस कर दिया था। इस युद्ध में अर्थपति भट्टारक मारा गया। 
7 स्कंदवर्मन(475 -515 ई.)
  1. जानकारी -पोड़ागढ़ शिलालेख(स्कंदवर्मन ने ही जारी करवाया था ), इस वंश का सबसे प्राचीन शिलालेख है। 
  2. राजधानी पुष्करी को इन्होने फिर से बसाया एवं अपने साम्राज्य का विस्तार किया। 
  3. पोड़ागढ़  में विष्णु मंदिर का निर्माण करवाया। 
  4. वाकाटक वंश के शासक देवसेन को पराजित किया । 
8 स्तंभराज :-
  1. कुलिया अभिलेख(दुर्ग )  में स्तंभराज व नंदराज का वर्णन मिलता है । 
9 नंदराज:-
  1. कुलिया अभिलेख(दुर्ग )  में स्तंभराज व नंदराज का वर्णन मिलता है । 
10 पृथ्वीराज :- 
  1. इसके शासनकाल में चालुक्यी वंशीय शासक कीर्तिवर्मन प्रथम ने नलों पर आक्रमण किया। 
11 विरुपाक्ष:-
  1. विलासतुंग  के पिता थे। 
12 विलासतुंग(700 -740 ई.):-
  1. इस वंश का सबसे प्रतापी राजा विलासतुंग था। 
  2. उपासक - विष्णु 
  3. जानकरी - राजिम शिलालेख 
  4. छत्तीसगढ़ के प्राचीन इतिहास का स्त्रोत विलासतुंग के राजिम शिलालेख से मिलता है । 
  5. 7 -8 शताब्दी के दौरान विलासतुंग ने राजिम में राजीव लोचन मंदिर का निर्माण कराया। 
  6. इन्ही की समय मंदिरो में मंडप, मडप द्धार का निर्माण हुआ। 
13 पृथ्वीव्याघ्र:-
  1. इनकी  जानकारी  उदयेन्दिरम शिलालेख से मिलती है। 
14 भीमसेन देव:-
  1. उपासक -शैव 
15 नरेंद्र थबल:-
  1. नल वंश के अंतिम शासक था । 

सोने के सिक्के चलवाने वाले नलवंशीय शासक:-

  1. वराहराज 
  2. अर्थपति भट्टारक 
  3. भवदत्त वर्मन 



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