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नल वंश (4 - 12 वी सदी )
- शासनकाल : 4 थी से 12 वी सदी
- राजधानी : पुष्करी(भोपालपट्टनम)/कोरापुट(ओड़िसा)
- शासन क्षेत्र : दंडकारण्य/महाकांतार
- संस्थापक : शिशुक
- वास्तविक संस्थापक : वरहराज
- वंश का वर्णन : वायु पुराण
- मुद्रा : अड़ेगा(कोंडागांव)
प्रमुख नलवंशीय ताम्रपत्र
- रिद्दीपुर ताम्रपत्र - भवदत्त
- कसरीबेड़ा ताम्रपत्र - अर्थपति
- पड़ियापाथर ताम्रपत्र - भीमसेन द्वीतीय
- राजिम शिलालेख - विलासतुंग
- पोड़ागढ़ शिलालेख - स्कंदवर्मन
नलवंश के प्रमुख शासक
1 शिशुक :-
- इसे नलवंश का संस्थापक माना जाता है।
- हरिषेण की प्रयाग प्रशस्ति के अनुसार समुन्द्रगुप्त ने दक्षिणापथ विजय अभियान के दौरान नलवंशीय शासक व्याघ्रराज को पराजित किया और व्याघ्रहंता की उपाधि धारण किया।
- इन्होने ने सिर्फ सत्ता का संचालन किया।
- इन्हे नलवंश का वास्तविक संस्थापक माना जाता है।
- वराहराज की मुद्रा कोंडागांव के अड़ेगा गांव से मिली है । अड़ेगा गांव में प्राप्त मृदभांड में 29 स्वर्ण मुद्राएं मिली है।
- उपाधि - महाराजा , भट्टारक
- विवाह - अंचाली भट्टारिका
- जानकारी - रिद्दीपुर ताम्रपत्र ,पोड़ागढ़ शिलालेख
- भवदत्त के रिद्दीपुर अभिलेख के अनुसार इन्होने ने वाकाटक नरेश नरेंद्र सेन को पराजित कर उसकी राजधानी नंदिवर्धन(नागपुर ) को तहस नहस कर दिया था ।
- राजधानी - पुष्करी।
- उपाधि -भट्टारक ।
- जानकारी - केसरीबेड़ा ताम्रपत्र ,पड़ियापाथर अभिलेख ,पोड़ागढ़ शिलालेख।
- कसरीबेड़ा ताम्रपत्र के अनुसार वाकाटक नरेश पृथ्वीसेन ने अर्थपति भट्टारक को पराजित कर उसकी रक्धानी पुष्करी को तहस-नहस कर दिया था। इस युद्ध में अर्थपति भट्टारक मारा गया।
- जानकारी -पोड़ागढ़ शिलालेख(स्कंदवर्मन ने ही जारी करवाया था ), इस वंश का सबसे प्राचीन शिलालेख है।
- राजधानी पुष्करी को इन्होने फिर से बसाया एवं अपने साम्राज्य का विस्तार किया।
- पोड़ागढ़ में विष्णु मंदिर का निर्माण करवाया।
- वाकाटक वंश के शासक देवसेन को पराजित किया ।
- कुलिया अभिलेख(दुर्ग ) में स्तंभराज व नंदराज का वर्णन मिलता है ।
- कुलिया अभिलेख(दुर्ग ) में स्तंभराज व नंदराज का वर्णन मिलता है ।
- इसके शासनकाल में चालुक्यी वंशीय शासक कीर्तिवर्मन प्रथम ने नलों पर आक्रमण किया।
- विलासतुंग के पिता थे।
- इस वंश का सबसे प्रतापी राजा विलासतुंग था।
- उपासक - विष्णु
- जानकरी - राजिम शिलालेख
- छत्तीसगढ़ के प्राचीन इतिहास का स्त्रोत विलासतुंग के राजिम शिलालेख से मिलता है ।
- 7 -8 शताब्दी के दौरान विलासतुंग ने राजिम में राजीव लोचन मंदिर का निर्माण कराया।
- इन्ही की समय मंदिरो में मंडप, मडप द्धार का निर्माण हुआ।
- इनकी जानकारी उदयेन्दिरम शिलालेख से मिलती है।
- उपासक -शैव
- नल वंश के अंतिम शासक था ।
सोने के सिक्के चलवाने वाले नलवंशीय शासक:-
- वराहराज
- अर्थपति भट्टारक
- भवदत्त वर्मन


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