तुगलक वंश :1320-1414 ई.
गयासुद्दीन तुगलक : 1320-1325 ई.
- खिलजी वंश का अंत कर एक नए वंश का उदय हुआ जिसे तुगलक वंश के नाम से जाना गया। तुगलक वंश का पहला शासक गाज़ी मालिक ने गयासुद्दीन तुगलक के नाम से गद्दी पर बैठा।
- यह दिल्ली सल्तनत में तुगलक वंश की स्थापना करने वाला पहला शासक था जिसका पूर्व नाम गाजी मालिक था
- गयासुद्दीन 8 सितम्बर 1320 में गद्दी पर बैठा और अगले पांच वर्षो तक शासन किया वह पहला ऐसा शासक था जिसने अपने नाम के साथ गाजी(काफिरो का वध करने वाला ) शब्द जोड़ा , इसे तुगलक गाजी भी कहते है।
गयासुद्दीन तुगलक के सुधार :
1. अल्लाउद्दीन खिलजी द्वारा लागु की गई भूमि पैमाइश तथा बाजार नियंत्रण व्यवस्था को त्याग दिया।
2. उसने लगान के रूप में 1 /10 या 1 /12 हिस्सा लेने का आदेश जारी किया।
3. मध्यवर्ती जमीदारो( विशेषकर मुकद्दम व खुतो) को पुराने अधिकार लौटा दिया ।
4. उसने सिचाई के लिए कुओ और नहरों का निर्माण करवाया , ऐसा करने वाला गयासुद्दीन प्रथम सुल्तान था।
5. सल्तनत काल में डाक व्यवस्था को सुदृढ़ करने का श्रेय गयासुद्दीन तुगलक को ही जाता है।
6. अल्लाउद्दीन खिलजी द्वारा लागु हुलिया एवं दाग प्रणाली को बनाये रखा।
खुशरोशाह द्वारा अनावशयक रूप से वितरित किये धन को वापस लेने का प्रयत्न किया तथा सभी लाभ भोगियो को ,जिनमे निजामुद्दीन औलिया भी शामिल थे ,जिसे धन वापस करने को कहा गया। इस क्रम में निजामुद्दीन औलिया से विवाद हो गया ,गयासुद्दीन ने औलिया को दंडित करना चाहा परन्तु उसे बंगाल अभियान में निकलना पड़ा गयासुद्दीन ने औलिया को चेतावनी दी की मेरे पुनः दिल्ली लौटने से पहले धन वापस कर दिया जाये। इस पर औलिया ने कहा था कि दिल्ली अभी दूर ‘हुनोज दिल्ली दूरस्त' है।
विजय अभियान :
- 1319 ई में गयासुद्दीन बहादुर ने बंगाल का स्वंत्रत शासक घोषित कर दिया।
- 1329 ई में गयासुद्दीन तुगलक ने स्वयं बंगाल अभियान किया, जंहा उसे सफलता प्राप्त भी मिली।
गयासुद्दीन तुगलक के पुत्र जौना खां द्वारा अहमद नियाज के निरीक्षण में लकड़ी का एक महल बनवाया। जो हाथियों की परेड के दौरान मची भगदड़ से ढह गया। इसमें दबकर गयासुद्दीन की मृत्यु हो गई।
1324 ई में गयासुद्दीन के पुत्र जौना खां ,जो उस समय देवगिरि का गवर्नर था ,इसने वारंगल को जीतकर दिल्ली सल्तनत में मिला लिया। वारंगल का नाम सुल्तानपुर रख दिया।
निर्माण :
तुगलकाबाद के दुर्ग कि नीव रखी।


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