प्रतिबिम्ब(Image)
किसी बिंदु से चलने वाली प्रकाश की किरणें परावर्तन अथवा अपवर्तन के पश्चात जिस बिंदु पर मिलती हे या जिस बिंदु से अपसरित (फैलती हुई) प्रतीत होती है,उस बिंदु को वस्तु का प्रतिबिम्ब कहते है .किसी बिंदु से असंख्य किरणें निकलती है ,किन्तु प्रतिबिम्ब की स्थिति ज्ञात करने के लिए केवल दो किरणें ही पर्याप्त होती है .
किसी बिंदु से चलने वाली प्रकाश की किरणें परावर्तन अथवा अपवर्तन के पश्चात जिस बिंदु पर मिलती हे या जिस बिंदु से अपसरित (फैलती हुई) प्रतीत होती है,उस बिंदु को वस्तु का प्रतिबिम्ब कहते है .किसी बिंदु से असंख्य किरणें निकलती है ,किन्तु प्रतिबिम्ब की स्थिति ज्ञात करने के लिए केवल दो किरणें ही पर्याप्त होती है .
प्रतिबिम्ब दो प्रकार के होते है.
1 वास्तविक प्रतिबिम्ब(Real Image) - जब किसी बिंदु से चलने वाली प्रकाश की किरणें परावर्तन या अपवर्तन के पश्चात जिस बिंदु पर मिलती है ,उस बिंदु पर बना प्रतिबिम्ब उस वस्तु का वास्तविक प्रतिबिम्ब होता है.वास्तविक प्रतिबिम्ब सदैव उल्टा बनता है और इसे पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है .वास्तविक प्रतिबिम्ब सदैव अवतल दर्पण में बनते है.
2 आभासी प्रतिबिम्ब(Virtual Image) - जब किसी बिंदु से चलने वाली प्रकाश की किरणें परावर्तन या अपवर्तन के पश्चात जिस बिंदु पर मिलती नही बल्कि आती हुई प्रतीत होती है तो उस बिंदु पर बना प्रतिबिम्ब उस वस्तु का आभासी प्रतिबिम्ब होता है.आभासी प्रतिबिम्ब सदैव सीधा बनता है और इसे पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता है . यहाँ उत्तल व अवतल दोनों में बनते है .


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