जब किसी कमरे में अंधेरा होता है तो वहां रखी गयी वस्तुए दिखाई नहीं देती. लेकिन यदि किसी प्रकाश स्त्रोत जैसे मोमबत्ती ,लालटेन , या विधुत बल्ब को कमरे में जलाये तो ये वस्तुयें दिखाई देने लगती है. प्रकाश पहले इन वस्तुओ पर पड़ता है तथा उनसे लौटकर हमारी आँखों में पड़ता है. वास्तव में प्रकाश एक प्रकार की ऊर्जा है ,जो हमारी आंखों को संवेदित करता है.
सामान्यतः प्रकाश की उत्पत्ति के लिए ऊष्मा की आवश्यकता पड़ती है लेकिन कभी कभी ऊष्मा के बिना भी प्रकाश निकलता है. जैसे जुगनू का प्रकाश ,कुछ समुद्री जीव जो उष्माहीन प्रकाश का उदाहरण है. उष्माहीन प्रकाश का उपयोग जीवो के द्वारा शिकार को खोजने में किया जाता है.
प्रकाश
के स्त्रोत
तारा
,सूर्य ,व अंतरिक्ष के अन्य प्रकाश
के स्त्रोत है. इन तारो के अंदर हाइड्रोजन परमाणु
लगातार हीलियम परमाणु में बदलते रहते है l इस
प्रक्रिया में अपार ऊर्जा की उत्पत्ति होती है तथा ऊर्जा का एक भाग पृथ्वी को
प्रकाश के रूप में प्राप्त होता है l
प्रकाश
ऊर्जा का एक रूप है प्रकाश का ज्ञान हमें आँखों से होता है पृथ्वी पर प्रकाश एवं
ऊष्मा का सबसे बड़ा स्त्रोत सूर्य है.
प्रकाश
की खोज का श्रेय न्यूटन को जाता है. न्यूटन के अनुसार प्रकाश 7 रंगो का मिश्रण है. श्वेत प्रकाश में 7 रंग होते है जिसे प्रिज्म की सहायता
से पृथक-पृथक किया जा सकता है l
प्रकाश
के सन्दर्भ में प्रस्तुत विभिन्न मत
1 कणिका सिद्धांत : इस सिद्धांत के प्रतिपादक न्यूटन है. इनके अनुसार प्रकाश अनगिनत कणो से मिलकर बना है.
2 तरंग सिद्धांत : इस सिद्धांत के
प्रतिपादक हाइगन है. इन्होने मत दिया कि प्रकाश तरंगो से
मिलकर बना है, प्रकाश तरंगो के रूप में गमन करता है. प्रकाश अनुप्रस्थ तरंग कि तरह व्यवहार
प्रदर्शित करता है, इनके संचरण के लिए किसी भौतिक माध्यम
के आवश्यकता नहीं होती, प्रकाश तरंगे निर्वात में गमन कर सकती
है l
3 प्रकाश की दोहरी प्रकृति : इस
सिद्धांत के प्रतिपादक डी-ब्रागाली है l इनके
अनुसार प्रकाश कण एवं तरंग दोनों से मिलकर बना है l
4 क्वांटम सिद्धांत : इस सिद्धांत के प्रतिपादक मैक्सप्लांक है. इन्होने कहा कि प्रकाश ऊर्जा के छोटे- छोटे पैकेटो एवं बंडलों के रूप में गमन करता है. ऊर्जा के छोटे -छोटे पैकेट एवं बण्डल क्वांटम कहलाते है.
5 फोटॉन सिद्धांत : 1905
में आइंस्टीन ने अपने फोटॉन सिद्धांत में बतलाया कि प्रकाश ऊर्जा के छोटे- छोटे
पैकेटो एवं बंडलों के रूप में गमन करता है. ऊर्जा के छोटे -छोटे पैकेट एवं बण्डल फोटॉन
कहलाते है l
E=mc2
6 सापेक्षिकता का सिद्धांत : आइंस्टीन के द्रव्यमान ऊर्जा तुल्य समीकरण में यह कहा गया कि इस संसार में सबसे तेज गति प्रकाश की है जोकि निर्वात में 3*10 की पावर 8 मीटर /सेकंड के रूप में विधमान है.
7 प्रकाश विधुत प्रभाव : इसके खोजकर्ता हेनरिक हर्ट्ज़ है ,इस सिद्धांत के अनुसार जब किसी धातु की सतह में प्रकाश डाला जाता है. तब इलेक्ट्रानो का उत्सर्जन से विधुत प्रभाव उत्पन्न होता है.
8 प्रकाश विधुत प्रभाव का सत्यापन : इसके सत्यापनकर्ता अल्बर्ट आइंस्टीन है. इन्होने कहा कि प्रकाश कि एकलक इकाई फोटॉन कहलाती है. प्रकाश अनगिनत फोटॉन से मिलकर बना है. मैक्सप्लांक क्वांटम सिद्धांत के आधार पर आइंस्टीन ने प्रकाश विधुत प्रभाव कि सफल व्याख्या की जिसके कारण 1921 में भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से आइंस्टीन को सम्मानित किया गया.
9 विधुत चुंबकीय तरंग सिद्धांत : मैक्सवेल के अनुसार प्रकाश विधुत चुंबकीय तरंगो के रूप में संचरित होता है. दृश्य प्रकाश का तरंग दैर्ध्य से 3900 -7800 ऐंगस्ट्रम के बीच होता है.जबकि नेनो मीटर में प्रकाश का तरंग दैर्ध्य 400 -700 नैनोमीटर के बीच होता है.
प्रकाश
की चाल
वायु तथा निर्वात में प्रकाश की चाल सबसे अधिक होती है l निर्वात में प्रकाश की चाल तीन लाख किलोमीटर प्रति सेकंड होती है. भिन्न भिन्न माध्यमों में प्रकाश की चाल भिन्न भिन्न होती है. तथा यह माध्यम के अपवर्तनांक पर निर्भर करती है. जिस माध्यम का अपवर्तनांक जितना अधिक होता है उसमे प्रकाश के चाल उतनी ही काम होती है.
विभिन्न
माध्यमों में प्रकाश की चाल:
निर्वात में प्रकाश की चाल : 3*10 की पावर 8
पानी में प्रकाश की चाल : 2.25 * 10 की पावर 8
कांच प्रकाश की चाल : 2.00 * 10 की पावर 8
तारपीन तेल में प्रकाश की चाल : 2.04 * 10 की पावर 8
नाइलोन में प्रकाश की चाल : 1.96 *10 की पावर 8
सूर्य से प्रकाश को पृथ्वी तक आने में में लगभग 500 सेकंड या 8 मिनट लगते है. प्रकाश का वेग ज्ञात करने में रोमर ,ब्राडली,फीजो ,फोकॉलट आदि वैज्ञानिको के योगदान महत्तवपूर्ण है.
सर्वप्रथम रोमर नमक वैज्ञानिक ने बृहस्पति गृह को देखकर प्रकाश का वेग ज्ञात किया था.


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