विधुत चुंबकीय स्पेक्ट्रम
दृश्य प्रकाश
दृश्य प्रकाश का अध्ययन सर्वप्रथम 1666 में सर आइजक न्यूटन ने किया था.यह विधुत चुंबकीय तरंगो का छोटा सा भाग होता है. इन तरंगो की आवृति 10 की पावर 14 Hz से 10 की पावर 12 Hz तथा तरंगदैर्घ्य 3 *10 की पावर -7 m से 7 .8*10 की पावर -7 होता है
एक क्वाण्टा सिद्धांत के अनुसार (E)= hv द्वारा दी जाती है। जहाँ h प्लांक नियतांक (Planck’s constant) औऱ v आपतित प्रकाश की आवृत्ति (frequency) है।
एक quanta की ऊर्जा = hv = hc/λ
जहाँ h = प्लांक नियतांक = 6.62607×10 की पावर माइनस 34 जूल-सेकेण्ड
c = प्रकाश का वेग = 3×108 m/s
λ = प्रकाश का तरंगदैर्ध्य
v = प्रकाश की आवृत्ति
दृश्य प्रकाश 7 रंगो का मिश्रण होता है .जिसमे सबसे ऊपर की तरफ लाल एवं सबसे निचली सतह पर बैंगनी प्रकाश होता है
सबसे कम तरंगदैर्ध्य बैंगनी रंग का होता है ,यह सबसे अधिक ऊर्जा वाला रंग है. जिसके कारण इसका प्रकीर्णन/फैलाव सबसे अधिक होता है .
सबसे अधिक तरंगदैर्ध्य लाल रंग का होता है ,यह सबसे न्यूनतम ऊर्जा वाला रंग है जिसके कारण इसका प्रकीर्णन/फैलाव सबसे कम होता है
आकाश या समुद्र का जल नीला ,नीले रंग के प्रकाश के प्रकीर्णनके कारण दिखलाई पड़ता है.
ख़तरे के संकेतो का लाल रंग इसलिए रखा जाता है .क्योकि लाल रंग प्रकीर्णन/फैलाव सबसे कम होता है
अवरक्त किरणें
इन किरणों की खोज 1800 में विलियम हर्शेल ने की थी इन तरंगो की आवृति 10 की पावर 12 Hz से 10 की पावर 10 Hz तथा तरंगदैर्घ्य 7 .8 *10 की पावर -14 m से 7 .8 * 10 की पावर -3 m होती है.
खोजवर्ष - 1800
उत्पत्ति - ये किरणें गर्म पिंडो (सूर्य ) और अणुओ द्वारा उत्पन्न होती है .इसलिए इन किरणों को उष्मीय किरणें भी कहते है .
गुण - ये किरणें फोटोग्राफिक प्लेटो को प्रभावित नहीं करती है.ये किरण उष्मीय प्रभाव को दर्शाती है.अधिक तरंगदैर्घ्य होने के कारण इनका फैलाव कम होता है .
उपयोग - भेदन क्षमता अधिक होने के कारण घने कोहरे एवं धुंध में सन्देश को पहुंचाने में इन किरणों का प्रयोग किया जाता है .
अँधेरे में फोटोग्राफी करने में ,पौधो घरो में पौधो को गर्म रखने में ,अस्पताल में रोगियों की सिकाई करने में ,टीवी रिमोर्ट कण्ट्रोल से उत्सर्जित विकिरण
हानिकारक - इन विकिरणों से कोई नुकसान नहीं होता है .
सूक्ष्म तरंगे
इनकी खोज 1888 में हर्ट्ज़ ने की.इन तरंगो की आवृति 10 की पावर 10 Hz से 10 की पावर 8 Hz तथा तरंगदैर्घ्य 10 की पावर -3 m से 10 की पावर 1 m होती है.
उत्पत्ति - इन तरंगो का उत्पादन निर्वात ट्यूबों जैसे - मेग्नेटोन ,कलाईस्ट्रोन आदि के द्वारा किया जाता है .
गुण - इन तरंगो का तरंगदैर्घ्य कम होता है
उपयोग - माइक्रोवेव ओवन में ,राडार प्रणाली में ,दूरसंचार में आदि .
रेडियो तरंगे
इन किरणों की खोज 1895 में मारकोनी ने की थी .इन तरंगो की आवृति 10 की पावर 6 Hz से 10 की पावर 4 Hz तथा तरंगदैर्घ्य 1 m से 10 की पावर 4 m होती है.इन्हे बेतार तरंगे भी कहा जाता है .
उत्पत्ति - ये तरंगे सुनामी ,भूकंप के द्वारा उत्पन्न की जाती है ..
गुण - इन तरंगो का तरंगदैर्घ्य अधिक होने के कारण ये तरंगे विवर्तित हो जाती है .
उपयोग - रेडियो प्रसारण में ,टेलीविज़न में इन किरणों का उपयोग किया जाता है .


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