स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत में 542 देसी रियासतें थी , जिसमें से 539 रियासते स्वेच्छा से भारत में विलय कर चुकी थी परंतु 3 रियासते जूनागढ़, हैदराबाद और जम्मू कश्मीर को भारत में विलीन करने में कठिनाई हुई|
1 जूनागढ़
को जनमत संग्रह के आधार पर भारत में तब मिलाया गया जब जूनागढ़ का शासक
पाकिस्तान भाग गया
2 हैदराबाद
की रियासत को
पुलिस कार्यवाही करके भारत में मिलाया गया |
3 जम्मू
कश्मीर रियासत के शासक ने पाकिस्तानी कबायलियों के आक्रमण के कारण विलय पत्र
पर हस्ताक्षर करके अपनी रियासत को भारत में मिलाया गया|
ब्रिटिश प्रांतों वह देशी रियासतों का
एकीकरण करके भारत में चार प्रकार की राज्यों का गठन किया गया यह राज्य थे
1 A राज्य- 216 देशी रियासतों को
ब्रिटिश भारत के पड़ोसी प्रांतों में मिलाकर ए राज्य का गठन किया गया जिसमें असम,
बिहार, मुंबई,
पंजाब ,संयुक्त
प्रांत ,मध्य प्रदेश ,पश्चिम
बंगाल, उड़ीसा,
मद्रास और आंध्र शामिल किए गए और इस प्रकार इनकी संख्या 10 थी
2 B राज्य- 275 देसी
रियासतों को नई
प्रशासनिक इकाई में गठित करके राज्य की श्रेणी प्रदान की जिसमें जम्मू कश्मीर, राजस्थान ,सौराष्ट्र ,मध्य भारत ,हैदराबाद ,मैसूर ,पेप्सू
,कोचीन और ट्रावनकोर शामिल किए गए और इस
प्रकार इनकी संख्या 8 थी
3 C राज्य- 61 देशी
रियासतों को
एकीकृत करके इसमें रखा गया जिसमें अजमेर ,बिलासपुर
,भोपाल , हिमाचल प्रदेश , कच्छ, मणिपुर, त्रिपुरा ,विंध्य प्रदेश और कुग्र
शामिल थे और इस
प्रकार इनकी संख्या 9 थी
4 D राज्य- अंडमान तथा निकोबार द्वीप समूह को D राज्य की श्रेणी में रखा
गया|
भाषाई आधार पर राज्यों का पुनर्गठन
1 1912 :- सर्वप्रथम 1912 में
भाषाई आधार पर तीन राज्यों बिहार, उड़ीसा तथा असम का गठन
किया गया था
2 1913 :- आंध्र महासभा की स्थापना भाषाई आधार पर तेलुगु
राज्य की
स्थापना की मांग करने के लिए किया गया
3 1918 :- मांटेग्यू चेम्सफोर्ड सुधार लागू करते समय भाषाई
आधार पर राज्यों के गठन के संबंध में विचार को मान्यता दी गई
4 1930 :- भारतीय कानूनी आयोग का गठन किया गया
जिसने जाति ,धर्म, भाषा ,आर्थिक
हित तथा भौगोलिक समानता के आधार पर राज्यों के गठन की सिफारिश की थी और इसी सिफारिश को 1936 में मान्यता प्राप्त होने
पर सिंध प्रांत का गठन किया
गया|
स्वतंत्रता के पूर्व और बाद में भारत का
प्रमुख राजनीतिक दल कांग्रेस राजनीतिक कारणों से भाषा के आधार पर राज्यों के
पुनर्गठन की मांग का समर्थन करती थी
कांग्रेस दल ने तेलुगु ,कन्नड़ , मराठी भाषा बोलने वाली
जनता के दबाव में आकर 27
नवंबर 1947 को राज्यों के भाषा के
आधार पर पुनर्गठन की मांग को मान लिया तथा संविधान सभा के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद
नए इलाहाबाद के उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एस के धर की अध्यक्षता में
एक भाषाई प्रांत आयोग का
गठन किया
4 एस
के धर आयोग :- इस आयोग का कार्य दक्षिण
भारत में उठी इस की मांग जांच करना था कि भाषा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन
उचित है या नहीं?
आयोग ने 10
दिसंबर 1948 को अपनी रिपोर्ट संविधान
सभा में प्रस्तुत की जिसमें भाषा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन का विरोध किया
गया था जबकि उसके द्वारा प्रशासनिक
सुविधा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन का समर्थन किया गया था|
परिणाम- उक्त आयोग की रिपोर्ट का तीव्र विरोध हुआ
जिसके फलस्वरुप जयपुर
अधिवेशन में भाषा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के मामले पर विचार करने के लिए JBP(जवाहर लाल नेहरू,वल्लभ भाई पटेल पट्टाभि
सीतारमैया) समिति का गठन किया गया इस
समिति ने 1 अप्रैल 1949
को अपनी
रिपोर्ट पेश की और भाषा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की मांग को अधिकार कर दिया|
समिति के द्वारा दी गई रिपोर्ट के प्रकाशन
के बाद मद्रास राज्य में रहने वाले तेलुगु भाषाई द्वारा आंदोलन प्रारंभ कर दिया
गया और इस आंदोलन का नेतृत्व
करने वाले पोट्टी श्रीरामुलु अनशन आमरण में बैठ गए और 56 दिन की लगातार अनशन
आमरण 1952 को उनकी मृत्यु हो गई जिसके
फलस्वरुप यहां आंदोलन तीव्र हो गया और इसी आंदोलन की तीव्र गति को देखते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री
जवाहरलाल नेहरू ने 19
दिसंबर 1952 को तेलुगु भाषा के आधार पर
पृथक आंध्र प्रदेश के गठन की घोषणा कर दी इस प्रकार 1 अक्टूबर 1953 को
आंध्र प्रदेश राज्य का गठन हुआ जो कि स्वतंत्र भारत में भाषा के आधार पर भारत का पहला
राज्य था|
6 राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन और
उस की सिफारिश :-
1 अक्टूबर 1953 को आंध्र प्रदेश राज्य के गठन के कारण भारत के अन्य राज्यों में भाषा के आधार पर गठन की मांग की गई जिसके कारण केंद्र सरकार ने 22 दिसंबर 1953 को राज्य पुनर्गठन आयोग की नियुक्ति की घोषणा की
1 अक्टूबर 1953 को आंध्र प्रदेश राज्य के गठन के कारण भारत के अन्य राज्यों में भाषा के आधार पर गठन की मांग की गई जिसके कारण केंद्र सरकार ने 22 दिसंबर 1953 को राज्य पुनर्गठन आयोग की नियुक्ति की घोषणा की
इस आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति सैयद फैजल अली थे तथा आयोग के
अन्य सदस्य के एम पणिक्कर तथा हृदयनाथ कुंजरू थे|
इस आयोग ने 30 दिसंबर 1955 को अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप दी जिसके फलस्वरुप 1956 में 14 राज्य और पांच संघ राज्य
क्षेत्रों का गठन किया गया|
14 राज्य जिसमें 1 आंध्र प्रदेश 2 बिहार 3 असम 4
मुंबई 5 जम्मू कश्मीर, 6 केरल, 7 मद्रास ,8 मैसूर ,9 उड़ीसा, 10 उत्तर प्रदेश 11 पंजाब 12 राजस्थान 13 मध्य प्रदेश 14 पश्चिम बंगाल
शामिल थी
5 संघ राज्य क्षेत्र 1 दिल्ली 2 हिमाचल प्रदेश 3 मणिपुर 4 त्रिपुरा 5 अंडमान
,निकोबार दीप समूह और
लक्ष्यदीप अमनदीप तथा मिनी का दीप का गठन
किया गया
स्वतंत्रता पूर्व मध्य प्रदेश वर्तमान स्वरूप में ना होकर
अलग-अलग प्रांतों तथा रियासतों
में विभक्त था |
1 ए
राज्य(ब्रिटिश प्रांत) :- मध्य प्रांत व बरार शामिल
किए गए थे जिसमें बघेलखंड ,छत्तीसगढ़ की रियासतों को
सम्मिलित किया गया था जिसकी राजधानी नागपुर थी
2 बी
राज्य :- इसमें मध्य भारत और पूर्वी
रियासतों को शामिल किया गया था जिन की दो राजधानियां थी
1 ग्वालियर 2 इंदौर
3 सी
राज्य :- इस
राज्य में भोपाल रियासत ,विंध्य प्रदेश ,महाकौशल को शामिल किया गया
था और
इसकी राजधानी रीवा थी|
4
D राज्य- अंडमान
तथा निकोबार द्वीप समूह को D राज्य की श्रेणी में रखा गया


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